बागेश्वर में एक और शिक्षिका का UTET अंकपत्र संदिग्ध, सत्यापन में खुली गड़बड़ी

उत्तराखण्ड शिक्षा

अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक दूसरे अभ्यर्थी का मिला, शिक्षा विभाग ने शुरू की कार्रवाई; जिले में अब तक 11 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी

देहरादून/बागेश्वर। उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती के दौरान प्रस्तुत किए गए शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन में अनियमितताएं सामने आने का सिलसिला जारी है। बागेश्वर जिले में एक और शिक्षिका के उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET) के अंकपत्र में गड़बड़ी मिलने का मामला सामने आया है। सत्यापन के दौरान अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक किसी अन्य अभ्यर्थी का पाया गया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले में इस तरह के मामलों में अब तक 11 शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जनवरी 2026 में हुई थी शिक्षिका की नियुक्ति

जानकारी के अनुसार, राजकीय प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़ी में तैनात शिक्षिका बबीता, पुत्री फकीर राम, की नियुक्ति जनवरी 2026 में हुई थी। नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से कराया गया। इस प्रक्रिया के दौरान उनके UTET अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक किसी दूसरे अभ्यर्थी का पाया गया।

सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद संबंधित अंकपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए। प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी आशाराम के अनुसार, बोर्ड से कराए गए सत्यापन में अनुक्रमांक दूसरे अभ्यर्थी का होने की पुष्टि हुई है। शिक्षा विभाग की ओर से मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

प्रदेश में 80 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने की जानकारी

उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती से जुड़े प्रमाणपत्रों की जांच का मामला व्यापक स्तर पर भी सामने आया है। अक्टूबर 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में सत्यापन के दौरान 80 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी या कूटरचित पाए गए थे। संबंधित शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई थी।

इससे पहले जून 2024 में प्रकाशित रिपोर्टों में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले 65 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने का उल्लेख किया गया था। वहीं, अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, 69 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे, जिनमें से 52 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका था।

ये आंकड़े अलग-अलग समय पर हुई जांच और कार्रवाई के चरणों से संबंधित हैं। इसलिए इन्हें जोड़कर कुल मामलों की संख्या मानना उचित नहीं होगा।

प्रमाणपत्रों के सत्यापन पर बढ़ा जोर

शिक्षक भर्ती में शैक्षिक प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनता जा रहा है। बागेश्वर में सामने आया ताजा मामला भी दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया की अहमियत को रेखांकित करता है।

विभागीय स्तर पर संबंधित शिक्षिका के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों में सत्यापन रिपोर्ट, संबंधित बोर्ड के अभिलेखों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।

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