हरेला: उत्तराखंड का लोकपर्व, जो प्रकृति, संस्कृति और हरियाली का संदेश देता है
उत्तराखंड का पारंपरिक लोकपर्व हरेला केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, पर्यावरण संरक्षण और समृद्ध कृषि परंपरा का जीवंत प्रतीक है। सावन मास के आगमन पर मनाया जाने वाला यह पर्व हरियाली, नई फसल, सुख-समृद्धि और जीवन में नई शुरुआत का संदेश देता है। इस अवसर पर घरों में विभिन्न प्रकार के अनाजों के बीज बोए जाते हैं, जिनसे उगी हरियाली को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। परिवार के बड़े-बुजुर्ग हरेला को आशीर्वाद स्वरूप सिर और कानों के पीछे रखते हैं तथा सभी के सुखद भविष्य की कामना करते हैं। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और वनों की कटाई जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब हरेला का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें केवल एक पौधा लगाने ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प भी देता है। यही कारण है कि हरेला अब उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश बनकर उभर रहा है
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