सीमा चौकियों पर अब नहीं सताएगा पानी का संकट, 9 जगहों पर होगी बोरिंग

उत्तराखण्ड

उत्तरकाशी: चीन-तिब्बत सीमा से सटे उत्तरकाशी के दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात आईटीबीपी जवानों के लिए सर्दियों में पेयजल संकट दूर करने की दिशा में काम तेज कर दिया गया है। अत्यधिक ठंड के दौरान नदी-नाले और प्राकृतिक जलस्रोत जम जाने से होने वाली परेशानी को देखते हुए सीमा चौकियों पर बोरिंग आधारित स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था विकसित की जा रही है।

करीब एक करोड़ रुपये की इस योजना के तहत नौ स्थानों पर बोरिंग की जानी है। इनमें नेलांग, कोपांग, नागा, पीडीए, सुमला, सोनम और त्रिपानी सीमा चौकियों पर बोरिंग का काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक बोरिंग से 100 लीटर प्रति मिनट से अधिक पानी मिलने की उम्मीद है।

आईटीबीपी की ओर से उपलब्ध कराई गई धनराशि से जल संस्थान इस योजना को धरातल पर उतार रहा है। बोरिंग पूरी होने के बाद पानी के भंडारण के लिए टैंक बनाए जाएंगे। साथ ही सीमा चौकियों तक पानी पहुंचाने के लिए भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी और बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में जलापूर्ति जारी रखने के लिए डीजल जनरेटर भी लगाए जाएंगे।

डीपीआर में संशोधन के बाद शुरू होगा निर्माण

जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार योजना की डीपीआर में कुछ संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। संशोधित डीपीआर भेज दी गई है। मौसम अनुकूल होते ही सिविल निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम के कारण निर्माण कार्य कराना चुनौतीपूर्ण रहता है।

सर्दियों में जम जाते हैं जलस्रोत

सीमा चौकियों पर फिलहाल कई स्थानों पर गुरुत्व आधारित पेयजल व्यवस्था से पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन सर्दियों में तापमान बेहद नीचे चले जाने के कारण प्राकृतिक जलस्रोत, नदी और नाले जम जाते हैं। इससे आईटीबीपी जवानों के लिए नियमित पेयजल उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है।

नई बोरिंग आधारित व्यवस्था से सीमा चौकियों पर पानी का स्थायी स्रोत तैयार होने की उम्मीद है। हालांकि, अत्यधिक ऊंचाई, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कड़ाके की ठंड के कारण परियोजना के निर्माण कार्य में कई व्यावहारिक चुनौतियां बनी रहेंगी।

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