चीन पर यूरोप को ‘कड़ा सबक’, बेल्जियम के PM बोले- भारत ने पहले ही दी थी चेतावनी

नई दिल्ली

नई दिल्ली। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने चीन पर अत्यधिक व्यापारिक निर्भरता को लेकर यूरोप को मिली सीख का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने यूरोपीय देशों को इस खतरे के प्रति पहले ही आगाह किया था, लेकिन तब उसकी चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया। भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए डी वेवर ने एक व्यापारिक कार्यक्रम में चीन का नाम लिए बिना उसे ‘‘ऐसा पड़ोसी जिसे आप सभी जानते हैं’’ बताया।

चीन पर निर्भरता से कमजोर हुआ यूरोपीय उद्योग

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक यूरोप में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता वाले सामान लागत से कम कीमतों पर बाजार में आते रहे। इससे यूरोप के औद्योगिक आधार पर दबाव बढ़ा और कई क्षेत्रों में ऐसी निर्भरताएं विकसित हुईं, जिनका इस्तेमाल आर्थिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।

डी वेवर के मुताबिक, भारत ने इस चुनौती को यूरोप से पहले पहचान लिया था और यूरोपीय देशों को चेतावनी भी दी थी। उन्होंने कहा कि अब यूरोप इस संदेश को गंभीरता से समझ रहा है और भारत के साथ भरोसेमंद साझेदारी की जरूरत महसूस कर रहा है।

चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा चिंता का कारण

यूरोपीय संघ और चीन के बीच व्यापार असंतुलन लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीन के साथ यूरोपीय संघ का वार्षिक व्यापार घाटा करीब 360 अरब यूरो है। चीन से यूरोपीय संघ का आयात 559.4 अरब यूरो, जबकि निर्यात करीब 199.6 अरब यूरो बताया गया है।

सस्ते चीनी उत्पादों से यूरोपीय विनिर्माण क्षेत्र पर दबाव बढ़ने की चिंता भी लगातार सामने आ रही है। रसायन, ऑटोमोबाइल, इस्पात और दवा जैसे क्षेत्रों में चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को लेकर यूरोपीय देशों में बहस तेज है।

भारत की ओर बढ़ रही यूरोप की नजर

चीन पर निर्भरता घटाने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित बनाने के प्रयासों के बीच यूरोप भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है। भारत खुद भी चीन के साथ बड़े व्यापार घाटे का सामना कर रहा है और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, निवेश की जांच तथा डंपिंग-रोधी उपायों के जरिए अपने उद्योगों को संरक्षण देने की कोशिश करता रहा है।

2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। ऐसे में भारत और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ना दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत-ईयू व्यापार समझौते से नई उम्मीद

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते ने दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दी है। इससे यूरोप को अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डी वेवर ने भारत और यूरोप के बीच बढ़ते भरोसे को रेखांकित करते हुए कहा कि बदलती और विभाजित वैश्विक व्यवस्था में विश्वास महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अपनी अलग रणनीतिक पहचान और इतिहास के बावजूद मजबूत साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

बेल्जियम के साथ रक्षा और आर्थिक सहयोग भी बढ़ा

डी वेवर की भारत यात्रा करीब दो दशक बाद किसी बेल्जियम प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा है। दोनों देशों के संबंध अब पारंपरिक हीरा कारोबार से आगे बढ़कर रक्षा, सेमीकंडक्टर, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों तक विस्तार कर रहे हैं।

दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में समझौतों का स्वागत किया। बेल्जियम ने भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने और पाकिस्तान को रक्षा उपकरण व तकनीक उपलब्ध न कराने का आश्वासन भी दिया।

सार: चीन पर बढ़ती निर्भरता से मिले अनुभव के बीच यूरोप अब भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।

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