दून मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बुखार, सर्दी-खांसी से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे; डॉक्टरों ने हाथ-पैर और मुंह पर लाल दाने दिखने पर सतर्क रहने की दी सलाह
देहरादून। गर्मी से सर्दी की ओर बदलते मौसम के बीच बच्चों में वायरल संक्रमण के मामले सामने आने लगे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही कुछ बच्चों में हैंड-फुट-माउथ डिजीज (एचएफएमडी) के मामले भी सामने आए हैं। बाल रोग विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बच्चों की सेहत को लेकर सतर्क रहने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी है।
दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक के मुताबिक, इन दिनों ओपीडी में वायरल संक्रमण से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें हैंड-फुट-माउथ डिजीज के तीन से चार मामले भी सामने आ रहे हैं। यह एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। स्कूल जाने वाले बच्चों में इसके फैलने का खतरा अधिक रहता है। संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने से घर के दूसरे बच्चों में भी संक्रमण फैल सकता है।
मुंह, हथेलियों और तलवों पर दाने दिखें तो रहें सतर्क
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चे के मुंह के अंदर, हथेलियों या पैरों के तलवों पर लाल दाने, चकत्ते या रैश दिखाई देने पर अभिभावकों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। ऐसे लक्षण नजर आने पर बच्चे को नजदीकी अस्पताल ले जाकर बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह मिलने से बच्चे की स्थिति पर निगरानी रखने में मदद मिलती है।
संक्रमित बच्चे को स्कूल न भेजें
डॉक्टरों ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। यदि बच्चे में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो उसे स्कूल न भेजें और दूसरे बच्चों के संपर्क से दूर रखें। बच्चों को नियमित रूप से हाथ धुलवाना, उनकी व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना और पौष्टिक आहार देना भी जरूरी है।
बीमारी के लक्षण रहने तक बच्चे को स्कूल से दूर रखें। दोबारा स्कूल भेजने से पहले डॉक्टर की सलाह लें, ताकि संक्रमण फैलने की आशंका को कम किया जा सके।
खानपान और स्वच्छता पर दें विशेष ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों को विभिन्न प्रकार के वायरल संक्रमण हो सकते हैं। छोटे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली अभी विकसित हो रही होती है, इसलिए उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
अभिभावकों को बच्चों के खानपान, साफ-सफाई और नियमित टीकाकरण पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर अपने स्तर से दवा देने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
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