मसूरी अस्पताल में मासूम की मौत पर बवाल, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप; जांच समिति गठित

उत्तराखण्ड क्राइम

मसूरी। मसूरी स्थित उप जिला चिकित्सालय में करीब एक वर्षीय मासूम बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। शोकाकुल परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताते हुए पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है। घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, जबकि मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है।

परिजनों का आरोप- समय पर नहीं मिला इलाज

मृतक बच्चे की मां, जो बार्लोगंज क्षेत्र की निवासी हैं, ने आरोप लगाया कि सोमवार तड़के करीब पांच बजे वह अपने बीमार बच्चे को लेकर उप जिला चिकित्सालय पहुंचीं, लेकिन उस समय अस्पताल में कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। उनका कहना है कि काफी देर तक गुहार लगाने के बाद डॉक्टर और स्टाफ पहुंचे, लेकिन बच्चे का समुचित उपचार नहीं किया गया।

परिजनों का आरोप है कि उन्हें यह कहकर घर भेज दिया गया कि बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक सुबह आठ बजे आएंगे। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार मिल जाता तो संभवतः बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने मामले में दोषी चिकित्सकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अब तक नहीं दी गई लिखित शिकायत

हालांकि, अस्पताल प्रशासन और मसूरी पुलिस के अनुसार, घटना के संबंध में अब तक परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत या तहरीर नहीं दी गई है। फिलहाल मामला परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और अस्पताल प्रशासन के स्पष्टीकरण तक सीमित है।

अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार

उप जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. खजान सिंह चौहान ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई।

उनके अनुसार, फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि महिला के अस्पताल पहुंचते ही ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल बच्चे को अटेंड किया और कुछ ही समय बाद चिकित्सक भी मौके पर पहुंचकर बच्चे की जांच करने लगे।

सीएमएस ने बताया कि जांच के दौरान परिजनों ने पहले से चल रहे उपचार और दवाइयों की जानकारी दी थी। चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति का परीक्षण करने के बाद कुछ पुरानी दवाइयां बंद कर नई दवाइयां लिखीं तथा सुबह बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक को दोबारा दिखाने की सलाह दी थी।

जांच समिति करेगी सभी पहलुओं की पड़ताल

डॉ. चौहान ने बताया कि प्रथम दृष्टया अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। समिति चिकित्सा रिकॉर्ड, ड्यूटी चार्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सभी तथ्यों की जांच करेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी चिकित्सक या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

घटना ने पकड़ा राजनीतिक रंग

मासूम की मौत के बाद मामला राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। घटना के बाद कुछ स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। हालांकि स्थानीय नागरिकों का एक वर्ग इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो बिना कारण अस्पताल और चिकित्सकों की छवि खराब करना भी उचित नहीं होगा।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

मासूम की मौत से परिजनों में गहरा शोक है, जबकि अस्पताल प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे चिकित्सकीय लापरवाही थी या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ पाएगी।

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