देहरादून : प्रेमनगर थाने के पूर्व प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों पर मुकदमे के आदेश

उत्तराखण्ड क्राइम

दंपति ने लगाया मारपीट और टॉर्चर का आरोप, कोर्ट ने सीओ स्तर के अधिकारी से जांच के दिए निर्देश

देहरादून। प्रेमनगर थाने से जुड़े एक मामले में द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देहरादून की अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी नरेश राठौर समेत पांच पुलिसकर्मियों और यशपाल तंवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने मामले की जांच निरीक्षक से वरिष्ठ स्तर के अधिकारी यानी सीओ स्तर से कराने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश प्रवीण सेमवाल और उनकी पत्नी प्रतीक्षा सेमवाल की ओर से धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से पेश दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद स्वतंत्र एवं प्रभावी जांच को आवश्यक माना।

दंपति ने लगाया मारपीट का आरोप

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता संजीव कुमार के मुताबिक, 9 अप्रैल 2026 को कुछ पुलिसकर्मी निजी वाहन से प्रवीण सेमवाल और उनकी पत्नी प्रतीक्षा के पास पहुंचे और दोनों को कथित तौर पर जबरन प्रेमनगर थाने ले गए। आरोप है कि रास्ते में उन्हें एनकाउंटर की धमकी दी गई और थाने में प्रवीण के साथ मारपीट की गई। पत्नी प्रतीक्षा ने बीच-बचाव किया तो उनके साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है।

पीड़ित पक्ष का दावा है कि उस समय प्रतीक्षा गर्भवती थीं और कथित मारपीट के बाद उन्हें ब्लीडिंग हुई। इस संबंध में मेडिकल दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए। साथ ही आरोप लगाया गया कि थाने में दबाव बनाकर यशपाल तंवर को 20 लाख रुपये देने का लिखित समझौता कराया गया।

बच्चे को घर पर अकेला छोड़ने का आरोप

अधिवक्ता के अनुसार, दंपति को 9 से 10 अप्रैल तक थाने में रखा गया। इस दौरान दोनों ने पुलिस को बताया कि उनका चार वर्षीय बच्चा घर पर अकेला है और पत्नी को बच्चे को दूध पिलाने के लिए घर जाने देने का अनुरोध किया, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उनकी मांग नहीं मानी।

इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ पुलिसकर्मियों से मारपीट, वर्दी फाड़ने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया। पीड़ित पक्ष ने इस मुकदमे को झूठा बताया। अधिवक्ता के मुताबिक, जमानत पर सुनवाई के दौरान दस्तावेज और अन्य तथ्य अदालत के समक्ष रखे गए, जिसके बाद दोनों को उसी दिन जमानत मिल गई।

पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं पुलिस ने अदालत में दाखिल अपनी रिपोर्ट में दंपति की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत और निराधार बताया। पुलिस के अनुसार, प्रतीक्षा सेमवाल और आकाश बंगवाल थाने पहुंचे थे, जहां महिला उपनिरीक्षक के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। पुलिस ने महिला उपनिरीक्षक की वर्दी फाड़ने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का भी आरोप लगाया है।

पुलिस ने थाने की सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि फुटेज में प्रतीक्षा और आकाश को थाने में शोर-शराबा करते हुए देखा गया।

स्वतंत्र जांच पर कोर्ट ने दिया जोर

अदालत ने दोनों पक्षों के आरोपों और पुलिस रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए स्वतंत्र एवं प्रभावी जांच को जरूरी माना। चूंकि आरोप तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक स्तर के अधिकारी से जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने उनसे वरिष्ठ स्तर के अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

एसपी सिटी देहरादून प्रमोद कुमार के मुताबिक, कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा और सीओ स्तर के अधिकारी से जांच कराई जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाएगी।

सीबीसीआईडी जांच की मांग

कोर्ट के आदेश के बाद प्रवीण सेमवाल ने कहा कि उन्हें न्यायिक व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। उनका आरोप है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की है।

अधिवक्ता संजीव कुमार ने कहा कि अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए सिविल पुलिस के बजाय सीबीसीआईडी से जांच कराने का प्रयास किया जाएगा।

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